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क्या, सपा सरकार पर भारी पड़े राजभवन के सवाल

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क्या, सपा सरकार पर भारी पड़े राजभवन के सवाल
विधानसभा चुनाव में सपा की हार के बाद राजभवन से सरकार के रिश्तों की खटास पर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई बार तो सरकार और राजभवन में टकराहट की स्थिति भी बनी। राज्यपाल राम नाईक ने अखिलेश सरकार के कई फैसलों पर सवाल खड़े किए, जिससे लोगों के बीच सरकार की मनमानी का भी संदेश गया और चुनाव में सपा को इसका खमियाजा उठाना पड़ा।

83 वर्षीय नाईक पांच बार सांसद व तीन बार विधायक बनने के साथ ही अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं। तकरीबन पौने तीन वर्ष पहले राज्य के 28वें राज्यपाल बनने के बाद नाईक ने जहां राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खोल दिए वहीं आम जनता की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया। ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव व डीजीपी तक को पत्र लिखने में उन्होंने गुरेज नहीं किया। सांविधानिक व्यवस्था के तहत भले ही राजभवन का सीधे तौर पर राजनीति से कोई लेना-देना न हो लेकिन संविधान के दायरे में रहते हुए राज्यपाल ने सरकार की मनमर्जी पर अंकुश लगाने का हरसंभव प्रयास किया।

'गुड गवर्नेंस' के मद्देनजर मुख्यमंत्री को सौ से अधिक पत्र लिखने के साथ ही खास मुद्दों पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, वित्तमंत्री तक को भी पत्र लिखकर सपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। हालांकि अखिलेश सरकार इन पत्रों पर उदासीन ही बनी रही। राज्यपाल ने मंत्रियों की कारगुजारियों को देखते उनके मंत्रिमंडल में रहने तक के औचित्य पर भी सवाल उठाए। चुनाव के दौरान ही दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल में बनाए रखने पर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को बाकायदा पत्र लिखकर सवाल खड़े किए थे लेकिन उस पर भी अखिलेश यादव ने कुछ नहीं किया।

16 हजार लोगों से की मुलाकात

बतौर राज्यपाल तकरीबन पौने तीन वर्ष के कार्यकाल में राम नाईक की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने राजभवन के दरवाजे खोल कुल 16053 व्यक्तियों से मुलाकात की। इसके साथ ही राजभवन या राजधानी के 570 कार्यक्रमों में भाग लिया। इतना ही नहीं, प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में हुए 358 कार्यक्रमों में भी राज्यपाल ने शिरकत की।


उदासीनता से सरकार की किरकिरी

- दुष्कर्म के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल में बनाए रखने पर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर औचित्य बताने के लिए कहा। सरकार ने नोटिस नहीं लिया।
- मथुरा के जवाहर बाग में अवैध कब्जे को हटाने के दौरान जान-माल के नुकसान पर राज्यपाल ने सरकार से सरकारी जमीन पर कब्जे के संबंध में श्वेत पत्र जारी करने को कई पत्र लिखे लेकिन, सरकार चुप रही।
- मंत्रियों व अफसरों के भ्रष्टाचार संबंधी लोकायुक्त की 50 जांच रिपोर्ट में से 48 पर कार्यवाही न होने के संबंध में राज्यपाल ने कई पत्र लिखे लेकिन कुछ नहीं किया गया। इससे अखिलेश यादव पर भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर न होने के आरोप लगे।
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