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गठबंधन के बाद सीटों पर अटक सकती है बात, क्या चल पाएगा गठबंधन ?

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समाजवादी पार्टी का भले ही कांग्रेस पार्टी से गठबंधन का ऐलान हो चुका हो, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी सूबे में असमंजस बरकरार है. गठबंधन के ऐलान के बाद भी अभी तय नहीं हो पाया है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी कौन-कौन से प्रत्याशियों को किस विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारेगी. सीटों के तालमेल न हो पाने की वजह से जहां एक ओर कांग्रेस असमंजस में हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के नेता भी भ्रमित है. ऐसे में 298 सीटों पर सपा और 105 सीटों पर कांग्रेस के चुनाव लड़ने के तालमेल के बीच सपा नें 341 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे है. जबकि गठबंधन की गणित कहती है कि तकरीबन 43 सीटों पर सपा अपने उम्मीदवारों के नाम वापस लेगी. 

गठबंधन के ऐलान के बाद से जहां तमाम कांग्रेसियों और समाजवादियों की टिकट की आस टूटी है. वहीं सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने तय फार्मूले से ज्यादा उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारकर अपने नेताओं और कांग्रेसियों में बेचैनी पैदा कर दी है. गठबंधन के फार्मूले के तहत समाजवादियों को 298 और कांग्रेस खेमें को 105 टिकटों का बंटवारा हुआ है. वहीं ऐलान के बाद भी अभी तक सीटों का बंटवारा तक नहीं हो पाया है. हालांकि साईकिल की करियर पर अपने कैरियर की आस लगाए बैठे कांग्रेस अब वेट एंड वॉच की स्थिति में है. 

हालांकि गठबंधन के मसले पर समाजवादी पार्टी जितना कांग्रेस को झुका सकती थी, उतना उसने झुकाने का काम किया है. अब यही बात दोनों ही पार्टियों में अंदरूनी खाने में चर्चा का विषय बनी हुई है. लेकिन सवाल अभी भी इस बात का है कि आने वाले समय में क्या गठबंधन का बंधन लंबा चलेगा या फिर विधानसभा चुनाव के बाद ही इस निकाह का तलाक़ हो जाएगा. बहरहाल पार्टी के नेता रूठे नेताओं की बात मानने को तैयार नहीं और आने वाले समय में सबकुछ ठीक होने की उम्मीद जताई है. 



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